मैं जन्नत छोड़ आया पर झुका नइॅं
हम ऐसे लूसिफ़र जिन का ख़ुदा नइॅं
हाँ जीने की वजह बस एक तुम हो
वजह यूँ मरने की तो क्या से क्या नइॅं
मैं ख़ुद भी झूठ कह देता हूँ ख़ुद से
मैं बेशक काँच हूँ पर आइना नइॅं
हैं भाई यार जानम जाँ के रिश्ते
कलाकारी में पर कोई सगा नइॅं
मैं तुझ को रोकने को ऐ परिंदे
शजर तो बन गया पिंजरा बना नइॅं
कहीं उस से मुहब्बत सच में थी क्या
है क्या किस से मुहब्बत वो पता नइॅं
— KUNAL















