शौक़ हुजूम का था पहले तो अब तन्हाई का आदी है
अब भी तेरा दिल हाउस फ़ुल है या कोई कुर्सी ख़ाली है
मेरे जैसे तो और भी हैं जिन को इश्क़ सिखाती है तू
तेरा भी कोई आख़िरी है तू तो कितनों की पहली है
सुना है अब दिल लगाने के तो सब अंदाज़ नए हैं तेरे
दिल तोड़ने में भी कुछ नया है या वो पुरानी ही शैली है
देख मैं अब भी बिस्तर की एक चौथाई पर ही सोता हूँ
देख और तीन चौथाई पर याद आड़ी तिरछी फैली है
न जाने तुझ को पाने में कितने ही कुनाल शहीद हुए हैं
तुझ से भी कोई खेला था क्या जो तू सब से खेली है
— KUNAL















