"स्लीपिंग ब्यूटी"
वो औरत कितनी बेगानी थी
रोज़ाना हम बिस्तर होती थी
नींद उस को शायद ही आती थी
पर शब साथ हमेशा सोती थी
यूँ ही रोज़ गुजरता था हर दिन
और हर रात बसर यूँ होती थी
इक रात शोर था सन्नाटे में
मेरी नींद अचानक टूटी थी
मैं उठ बैठा और देखा उस को
वो मूर्छित हो ऐसे लेटी थी
शिकन नहीं थी माथे पर उस के
वो तो बेफ़िक्री से सोई थी
उस रात उस ने मारे ख़र्राटे
सीटी सी आवाज़ इक आती थी
मैं मन ही मन में मुस्का बैठा
दिल में लहर ख़ुशी की उठ्ठी थी
फिर मैं ने उस का माथा चूमा
कमरे में स्लीपिंग जो ब्यूटी थी
मुझ को उस पल ये एहसास हुआ
अब आज रात से वो अपनी थी
— KUNAL















