आए दिन मुझ सेे ख़फ़ा रहता है
दिल को इक डर सा लगा रहता है
सारा दिन प्यार करेगा मुझ सेे
जैसे तू घर पे बड़ा रहता है
सब सेे कहती है तुम्हारा शायर
मेरे पहलू में पड़ा रहता है
'इश्क़ वो खेल है जिस
में हर वक़्त
जान का ख़तरा बना रहता है
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