"हाँ वापिस जा रहा हूँ मैं"

हाँ वापिस जा रहा हूँ मैं
तुम से पाकर धोखा इश्क़ में
दिल को समझा रहा हूँ मैं
मैं ने तो इश्क़ किया था तुम्हें पाने के लिए
पर अब लगता है जैसे इश्क़ के दरिया में बहता जा रहा हूँ मैं

हाँ जाना अब तो वापिस जा रहा हूँ मैं

तुम्हें तो सब मालूम था मैं कैसा इश्क़ करता था तुम से
और किस कदर मैं इश्क़ में मरता था तुम पे
सब जान कर भी क्यूँ मुझे धोखा दिया तुम ने
और इक मैं हूँ जो अब भी तुम पे ऐतिबार करता जा रहा हूँ मैं

हाँ जाना अब तो वापिस जा रहा हूँ मैं

मैं देखता हूँ तुम ने कोई कसर न छोड़ी मेरे इश्क़ का मज़ाक़ बनाने में
पर मैं ने भी कोई कसर न छोड़ी वापिस तुम्हें अपना बनाने में
अब घिन आती है ख़ुद पर जो अब भी तुम पे मरता जा रहा हूँ मैं

हाँ जाना अब तो वापिस जा रहा हूँ मैं

कैसे भूलूं उस दिन को जब मैं ने रक़ीब को तेरी बाँहों में पाया था
जब चंद ऐशों आराम के लिए तुम ने मेरे इश्क़ को ठुकराया था
इस दर्द का एहसास तुम्हें भी हो इस लिए ख़ुदा से अब ये दुआ करता जा रहा हूँ मैं

हाँ जाना अब तो वापिस जा रहा हूँ मैं
अब तो वापिस जा रहा हूँ मैं

— Kushal "PARINDA"

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Dua Shayari

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