"मेरे दिल में है इक वो निशाँ"
मेरे दिल में है इक वो निशाँ जिसे छेड़ता हर एक है
तुझे ना दिखे क्यूँ वो निशाँ जिसे देखता हर एक है
छोड़ रहने दे, दर्द सहने दे
जो ना कहना था, वो भी कहने दे
इश्क़ दरिया में मुझ को बहने दे
मेरा दिल तो है इक आइना जिसे तोड़ता हर एक है
तुझ को पाया था, दिल में बसाया था
इश्क़ कर दिल को यूँ सताया था
इश्क़ कर ख़ुद को भी रुलाया था
मेरे दिल की कुछ ऐसी ज़मीं जिसे छोड़ता हर एक है
मेरे दिल में है इक वो निशाँ जिसे छेड़ता हर एक है
तुझे ना दिखे क्यूँ वो निशाँ जिसे देखता हर एक है
— Kushal "PARINDA"















