"ज़िन्दगी उधार लगती है"

जब से गए हो ज़िन्दगी उधार लगती है
बिना तेरे मुझे हर रात बे-ईमान लगती है
आ जाए अगर वापिस तो बाहों में समेटूँगा तुझे
साँस तो लेता हूँ फिर क्यूँ ज़िन्दगी बेजान लगती है

जब से गए हो ज़िन्दगी उधार लगती है

यूँ तुझे तो याद कर के दिन बीता लेता हूँ मैं
आने की तेरी ताख़ में नैन बिछाए रखता हूँ मैं
न जाने अब क्यूँ बिन तेरे अधूरी पहचान लगती है

जब से गए हो ज़िन्दगी उधार लगती है

नहीं मानता ये दिल मेरा पर कैसे सब भूल जाऊँ मैं
चल ये बता इस दिल का क्या इलाज करवाऊँ मैं
न जाने अब क्यूँ ज़िन्दगी उफ़ान लगती है

जब से गए हो ज़िन्दगी उधार लगती है

— Kushal "PARINDA"

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