दूरियाँ आ गईं ज़बानों मेंज़हर घोला गया है कानों मेंइश्क़ पर शे'र कह रहे हैं सबएक ही चीज़ है दुकानों मेंआप भी ज़ुल्म पर नहीं बोलेआप शामिल हैं बेज़ुबानों मेंक्यूँ नहीं भेजते किसी को ख़तकितने पंछी हैं आसमानों मेंइश्क़ में बा-वफ़ा रहा है जोनक़्ल करता था इम्तिहानों में— Lalit Pandey