इश्क़ का आलम-ए-इम्कान किसे कहते हैं

आजकल आप मिरी जान किसे कहते हैं

मुझ को बचपन में जो शैतान कहा करते थे
अब बताऊँगा कि शैतान किसे कहते हैं

मेरी आसानियाँ मुश्किल में बदल जाती हैं
मैं नहीं जानता आसान किसे कहते हैं

एक औरत पे उठा हाथ बता देता है
आदमी कौन है इंसान किसे कहते हैं

अपनी दस्तार गिरा जान बचाने वाले
तुम बताओगे कि अपमान किसे कहते हैं

इस लिए सीख लिया ग़ैज़ को क़ाबू करना
मुझ को मालूम है नुक़्सान किसे कहते हैं

वो कभी दौलत-ओ-शोहरत पे नहीं इतराते
जिन को ये इल्म है शमशान किसे कहते हैं

— Lalit Pandey

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