pahle bahta hua aankhoñ se samandar dekhen | पहले बहता हुआ आँखों से समुंदर देखें

  - Harsh Kumar Bhatnagar

पहले बहता हुआ आँखों से समुंदर देखें
या चमकता हुआ उस
में कोई गौहर देखें

सर पटकने से कभी पाप धुलेंगे तो नहीं
अब किसी प्यासे को पानी ही पिला कर देखें

घर की दीवारें सजा तो ली हैं शीशों से पर
ख़ुद को दुनिया से छिपाएँ या मुक़द्दर देखें

कब तलक राह में ही बैठे रहेंगे हम लोग
देर करने से तो अच्छा है कि चल कर देखें

एक तो वक़्त का पहले से तक़ाज़ा है बहुत
अब कोई शे'र सुनाएँ या मुकर्रर देखें

रक़्स करता हुआ बस आप ने बंदर देखा
उस मदारी का छिपाया हुआ नश्तर देखें

आप ने तो है फ़क़त हिज्र का दल-दल देखा
इक दफ़ा तो किसी मुफ़लिस का मुक़द्दर देखें

  - Harsh Kumar Bhatnagar

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