थक गए हम ज़िंदगी से
जी रहे हैं बेबसी से
अब पढ़ाई ही करूँगा
भर गया मन आशिक़ी से
दोस्त तुम से पूछना था
कुछ मिला क्या दुश्मनी से
हूँ अकेला ज़िंदगी में
मुझ को क्या है फ़रवरी से
जल रहे हैं अब के सारे
आदमी ही आदमी से
— Kabir Altamash
जी रहे हैं बेबसी से
अब पढ़ाई ही करूँगा
भर गया मन आशिक़ी से
दोस्त तुम से पूछना था
कुछ मिला क्या दुश्मनी से
हूँ अकेला ज़िंदगी में
मुझ को क्या है फ़रवरी से
जल रहे हैं अब के सारे
आदमी ही आदमी से
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