दिलों में मुरव्वत न होती
हमें फिर मुहब्बत न होती
हवाओं में निकहत न होती
फ़ज़ाओं में जन्नत न होती
बुराई अगर हो दिलों में
तभी फिर इबादत न होती
किए ही बिना सब मिले तो
तभी कोई मन्नत न होती
शब-ए-वस्ल भी ख़ूब होती
जुदाई में क़ुर्बत न होती
खुले आम आशिक़ मिले तो
उसी घर बग़ावत न होती
कमी जब दुआओं में होगी
वहाँ पर शफ़ा'अत न होती
कभी एक छत में "मनोहर"
जहाँ में अदावत न होती
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Manohar Shimpi
our suggestion based on Manohar Shimpi
As you were reading Breakup Shayari Shayari