intiqaam se pukaarta raha kabhi koi | इंतिक़ाम से पुकारता रहा कभी कोई

  - Manohar Shimpi

इंतिक़ाम से पुकारता रहा कभी कोई
रोष ख़ूब ही उतारता रहा कभी कोई

अजनबी मुझे मिले हर एक मोड़ पर यहाँ
रात दिन कहीं गुज़ारता रहा कभी कोई

दश्त में न पेड़ आम से दिखा लदा हुआ
आम पेड़ से उतारता रहा कभी कोई

कश्मकश मुसीबतें जगह जगह बहुत दिखीं
क्यूँ गरीब को निहारता रहा कभी कोई

जंग की ज़मीं पे ही बुझे कई चराग़ हैं
अस्त्र क्यूँ नए उतारता रहा कभी कोई

खेल सिर्फ़ खेलता रहा अदू वहाँ कोई
झूठ बात वो पुकारता रहा कभी कोई

बात अम्न की करे सिवा दिल-ओ-दिमाग़ से
जोश महज़ ही उतारता रहा कभी कोई

  - Manohar Shimpi

Inquilab Shayari

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