कैसी बेचैनी से चेहरा तेरा मुरझाया हुआ है
देख के हालत तेरी दिल मेरा घबराया हुआ है
हम सेफ़र को सब से पहली बार मिलने वो डरा था
याद करके पल अभी वो ख़ूब शरमाया हुआ है
रंज जिस का था वो यादें रोज़ आती हैं अभी भी
दिल-लगी में अब बहुत दिल को ही समझाया हुआ है
कैसे फिर कटते रहे वह दिन सिवा तेरे अकेले
सोच के दिल मेरा भी इस वक़्त उकताया हुआ है
एक मंज़र वो तबाही का बहुत बेचैन करता
धूप ने बे-घर हुए तो ख़ूब झुलसाया हुआ है
बेक़रारी उस नज़र की रंग लाएगी कभी तो
कैसे दिल को ही 'मनोहर' सिर्फ़ बहलाया हुआ है
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