कुछ भी हमारे साथ में अच्छा नहीं हुआ
या'नी बुरा हुआ है ज़ियादा नहीं हुआ
कुछ तो तअल्लुक़ात का रखना था पास भी
सब कुछ तो मेरे यार ये पैसा नहीं हुआ
सद-शुक्र हूँ मैं आज भी अपने ही आप सा
सद-शुक्र बे-वफ़ा तिरे जैसा नहीं हुआ
हम ख़ाक तेरी ज़ुल्फ़-ए-परेशाँ सँवारते
हम से तो अपना हाल भी अच्छा नहीं हुआ
कहते हो जान, जान से जाते नहीं मगर
'क़ैसर' वो या'नी जान से प्यारा नहीं हुआ
— Meem Maroof Ashraf















