लहू आँखों से बहता है हमारी
यही रातों का क़िस्सा है हमारी
यहाँ भी सब बने बैठे हैं तुझ से
यहाँ भी कौन सुनता है हमारी
तकल्लुफ़ कर ज़रा तू भी नई है
अभी फ़ुर्क़त भी ताज़ा है हमारी
मिले तुझ को भी कोई तेरे जैसा
यही बस इक तमन्ना है हमारी
— Meem Maroof Ashraf















