अदू से जो मुहब्ब्त कर रहे हो
अजी कैसी हिमाक़त कर रहे हो
जुनून-ए-इश्क़ की इस कैफ़ियत में
गुमाँ को क्यूँ हक़ीक़त कर रहे हो
मोहब्बत हो गई क्या मुझ से जो तुम
शरारत पे शरारत कर रहे हो
कभी देखी है सूरत आईने में
परीज़ादों की हसरत कर रहे हो
नहीं है इल्म कुछ कानून का भी
भला कैसी वकालत कर रहे हो
मोहब्बत की इता'अत करने वालो
दिलों में पैदा नफ़रत कर रहे हो
भुला कर दुश्मनी 'मीना' भला क्यूँ
इनायत पे इनायत कर है हो
— Meena Bhatt















