क्यूँचलेआएहमआशियाँछोड़कर
गाँवकीवोहसींवादियाँछोड़कर
फिरविदाहोगएतख़्तियाँछोड़कर
औरथोड़ीबहुतनेकियाँछोड़कर
आगयाहैबुलावागुलोंकाउन्हें
जारहेहैंभँवरतितलियाँछोड़कर
इश्क़मेंमुब्तलाहोगयावोभीअब
कैसेजाएँगीयेहिचकियाँछोड़कर
क्यूँँकोईजाएआख़िरअदालतमेंजब
मिलताकुछभीनहींपेशियाँछोड़कर
कबयेरहतीसदाहैंकिसीकेलिए
लोगजातेहैंफिरकुर्सियाँछोड़कर
सिर्फ़घरहीनहींछोड़तींबेटियाँ
अपनीजातीहैंवोशोख़ियाँछोड़कर