मैं जो थक भी जाऊँ दुआ करते करते
कि क़ासिर नहीं वो अता करते करते
सितम हम पे टूटे हज़ारों जहाँ में
तुम्हारा हमेशा कहा करते करते
न मिल पाए अल्फ़ाज़ हम को मुनासिब
क़लम थक गई तर्जुमा करते करते
मिलें रहमतें कुछ हमें भी ख़ुदा की
सहर हो चुकी है सना करते करते
ख़ता क्या थी हम को बताते ज़रा तो
कि रुख़्सत हुए हम पता करते करते
फ़ना कर दिया उस ने ख़ुद को वतन पर
कोई मर गया फ़र्ज़ अदा करते करते
निगाहें थी क़ातिल अदा आशिक़ाना
हुआ इश्क़ उन से वफ़ा करते करते
लबों पर दुआ अब कहाँ उन के 'मीना'
ख़ुदा बन गए ख़ुद ख़ुदा करते करते
— Meena Bhatt















