हाथ पर तितली बिठाना चाहती हूँ
मैं गुलों का दिल जलाना चाहती हूँ
पंछियों को भी मिले घर इसलिए मैं
पेड़ आँगन में लगाना चाहती हूँ
इक झलक अपनी दिखा मौला मुझे भी
ख़ुद को मैं तुझ पर लुटाना चाहती हूँ
मैं क़फ़स तोडूँ तू खिड़की खोल देना
क़ैद से ख़ुद को उड़ाना चाहती हूँ
फूल तूने ख़त में भेजा वो दिखा कर
मैं ख़िज़ाँ को मुँह चिढ़ाना चाहती हूँ
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