जुगनुओं संग रख़्त-ए-सफ़र के लिए
ढूँढ़ता हूँ परिंदे शजर के लिए
ज़ेहन में चंद यादों के पन्ने हैं बस
राह ख़ाली नहीं रह-गुज़र के लिए
वास्ता है चराग़ों से तेरा अगर
छोड़ दे ख़ुद को तन्हा सहर के लिए
इस सदाओं में आता है कोई नज़र
एक चेहरा है मेरी नज़र के लिए
— Ankur Mishra















