ज़िंदगी मर्ग-ए-नागहानी भी

दिल-शिकन थी मेरी कहानी भी

चीख़ना है हमारी क़िस्मत में
इस पे तेरी ये बे-ज़बानी भी

ज़िंदगी भर न हो सकी हम से
एक लम्हे की तर्जुमानी भी

तिश्ना-लब हर कोई था महफ़िल में
प्यासे भी हम भी और पानी भी

हम को अपनी तलाश थी दर-पेश
ख़ाक थे और ख़ाक छानी भी

ज़िंदगी से अज़ल ये एक नहीं
कोई सूरत है दरमियानी भी

कुछ सरोकार क्यूँ हो दुनिया से
एक हालत है ला-मकानी भी

— Miyan Umar

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