बस इक यही रिश्ता निभाना है मुझे
अब उसकी हाँ में हाँ मिलाना है मुझे
देखे नहीं थे ख़्वाब मैंने वस्ल के
दिल हिज्र के लायक़ बनाना है मुझे
उसके लबों पर सेहरा की बातें हैं सो
मजनू सिफ़त ख़ुद को बनाना है मुझे
वो संग दिल है ये सभी को है ख़बर
है मोम लहजा ये बताना है मुझे
क्या रेल से आवाज़ देता है कोई
क्या पटरियों पर लेट जाना है मुझे
उस सेे वफ़ा की अब तवक़्क़ो भी नहीं
अब ज़ख़्म दिल का ख़ुद छुपाना है मुझे
दिल को अज़ाखाना बनाना है मेरे
अब सोग यूँँ उसका मनाना है मुझे
मोईन उसको तो तमाशे भाते हैं
अंगारों की बारिश में आना है मुझे
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