मुझे अपनी ख़बर नहीं होती थी, एहसास नहीं होता था कोई
मगर इसका ये मतलब नहीं है मेरे पास नहीं होता था कोई
इक ऐसी चुड़ैल के ज़द में था मैं पिछली बरस की शामों में
जो ऐसी जगह से भी नोचती थी जहाँ मास नहीं होता था कोई
मुझे जड़ से उखाड़ने वालों की साँसों का उखड़ना रिवायत है
मैं पेड़ नहीं होता था कोई मैं घास नहीं होता था कोई
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