मैं ऐसे अहद में शाइ'र हुआ कि जब सब थे
वो सब कि जो ये समझते थे वो ही सब सब थे
मैं सिर्फ़ इस लिए ज़िंदा हूँ जब अज़ाब आए
तो उस से आँखें मिलाकर कहूँ ये सब सब थे
हसीन औरतें लश्कर में भर्ती कर दी गईं
शिकस्त हो गई दुश्मन को क्योंकि अब सब थे
क़यामत आई तो शिक़वे के तौर पर मैं ने
मज़ाक उड़ाया कहाँ रह गई थी जब सब थे
दो चार लोग मरेंगे तुम्हारे आने पर
ज़्यादा देर लगा दी है तुम ने तब सब थे
— Muzdum Khan















