apni khuddaari to paamaal nahin kar sakteus ka number hai magar kaal nahin kar sakte | अपनी ख़ुद्दारी तो पामाल नहीं कर सकते

  - Nadir Ariz

अपनी ख़ुद्दारी तो पामाल नहीं कर सकते
उस का नंबर है मगर काल नहीं कर सकते

सीम जाएगा तो फिर नक़्श उभारेंगे कोई
काम दीवार पे फ़िलहाल नहीं कर सकते

रह भी सकता है तिरा नाम कहीं लिक्खा हुआ
सारे जंगल की तो पड़ताल नहीं कर सकते

दोस्त तस्वीर बहुत दूर से खींची गई है
हम उजागर ये ख़द-ओ-ख़ाल नहीं कर सकते

रोती आँखों पे मियाँ हाथ तो रख सकते हैं
पेश अगर आप को रूमाल नहीं कर सकते

दे न दे काम की उजरत ये है मर्ज़ी उस की
पेशा-ए-इश्क़ में हड़ताल नहीं कर सकते

दश्त आए जिसे वहशत की तलब हो 'नादिर'
ये ग़िज़ा शहर हम इर्साल नहीं कर सकते

  - Nadir Ariz

Gareebi Shayari

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