कैसे ईमान नहीं लाएँगेहम तेरे सर की क़सम खाएंगेफूल फेकेंगे बस आने पे मेरेअपने बाज़ू नहीं फैलाएँगेइतने बरसो की जुदाई है कि अबउस को देखेंगे तो मर जाएँगे— Nadir Ariz