naye mujrim hain puranon ki taraf dekhte hain | नए मुजरिम हैं पुरानों की तरफ़ देखते हैं

  - Nadir Ariz

नए मुजरिम हैं पुरानों की तरफ़ देखते हैं
मुक़तदी अपने इमामों की तरफ़ देखते हैं

ख़ौफ़ से भाग खड़े होते हैं बुज़दिल फ़ौजी
हम नदामत से शहीदों की तरफ़ देखते हैं

इतना प्यारा है वो चेहरा कि नज़र पड़ते ही
लोग हाथों की लकीरों की तरफ़ देखते हैं

हिज्र रास आता तो क्यूँँ करते तुझे याद मियाँ
धूप लगती है तो छाँव की तरफ़ देखते हैं

क्या ख़सारा है इन्हें बच्चों का घर बसने में
हम तअ'ज्जुब से बुज़ुर्गों की तरफ़ देखते हैं

जिन को आसानी से दीदार मुयस्सर है तिरा
वो कहाँ बाग़ में फूलों की तरफ़ देखते हैं

पहला मौक़ा है मोहब्बत की तरफ़-दारी का
कभी उस को कभी लोगों की तरफ़ देखते हैं

  - Nadir Ariz

Promise Shayari

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