मुझे मिलने को आई है बड़े दिन बा'द बेचारी

  - nakul kumar
मुझेमिलनेकोआईहैबड़ेदिनबा'दबेचारी
हॅंसीहैखिलखिलाईहैबड़ेदिनबा'दबेचारी
मुझेहोंठोंसेछूकरकेकभीमाथेपेगालोंपे
नमीआँखोंमेंलाईहैबड़ेदिनबा'दबेचारी
कभीजोखोगयाथामैंकिजानेसोगयाथामैं
मुझेफिरसाथलाईहैबड़ेदिनबा'दबेचारी
मेरीबंजरज़मींपेवोबनीसरसोंसुनहरीसी
भरीपूरीउगआईहैबड़ेदिनबा'दबेचारी
कहींदीएजलाएहैंकहींमत्थाभीटेकाहै
कहींचादरचढ़ाईहैबड़ेदिनबा'दबेचारी
कभीचाॅंदीकाछल्लाइकजोमेरेनामकाहीथा
उसेफिरपहनआईहैबड़ेदिनबा'दबेचारी
हैकुछकहनेकीकोशिशमेंलबोंपेरोककरबातें
अभीकुछबुदबुदाईहैबड़ेदिनबा'दबेचारी
कभीकोयलथीबेचारीसुरोंसेकटगईलेकिन
अभीकुछगुनगुनाईहैबड़ेदिनबा'दबेचारी
बड़ेदिनबा'दबेटाजोख़ुशीसेमुस्कुरायाहै
मेरीमाँमुस्कुराईहैबड़ेदिनबा'दबेचारी
  - nakul kumar
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy

More by nakul kumar

As you were reading Shayari by nakul kumar

Similar Writers

our suggestion based on nakul kumar

Similar Moods

As you were reading undefined Shayari