yahaañ kisi bhi nazar men vo baat thii hi nahin | यहाँ  किसी  भी  नज़र  में  वो बात  थी  ही नहीं

  - Nakul kumar

यहाँ  किसी  भी  नज़र  में  वो बात  थी  ही नहीं
तुम्हारे   बाद  किसी   से  नज़र  मिली  ही  नहीं

जुदा  हुए  तो  भी  एहसास   तक  हमें  न  हुआ
कभी भी तर्क-ए-त'अल्लुक़ की बात की ही नहीं

न   साथ   थे   न   जुदा   थे   अजीब  हाल  रहें
मोहब्बतों   में    हमें    क़ुर्बतें   मिली   ही   नहीं

तेरे   ग़मों    ने    दिए    हैं    मुझे    नए   मा'नी
कि  ज़िंदगी  में   मेरी  अब  कोई  कमी ही नहीं

भरा   हुआ   है   फ़क़त  ज़हर   से  मेरा  साग़र
ये  तिश्नगी  भी   है  ऐसी  कि  मानती  ही  नहीं

तुम्हारे  साथ   ही   देखा  था   मुस्कराते   हुए
तुम्हारे  बाद  तो   ये  ज़िन्दगी   हँसी  ही  नहीं

ख़मोशियों   ने    ग़लतफ़हमियाँ   बढ़ाई    थीं
वो  गुफ़्तगू  भी   हुई   जो  कभी  हुई  ही नहीं

बिछड़  के  तुम सेे   हुई   मुल्तवी  उदासी मेरी
तुम्हारी टीस  तो  मुझ
में  कभी  टिकी ही नहीं

  - Nakul kumar

Ehsaas Shayari

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