yaad the jo raaste vo raaste galat the | याद थे जो रस्ते वो रस्ते ग़लत थे

  - Nakul kumar

याद थे जो रस्ते वो रस्ते ग़लत थे
सपनों पे चलते थे और सपने ग़लत थे

अब समझ आता हैं उनको देख कर ये
फ़ैसलों में अपने हम कितने ग़लत थे

साथ उसके थे भरम वाले वो दिन थे
अच्छे थे वो दिन मगर वैसे ग़लत थे

दिल भी पागल हैं निभाता था मरासिम
दिल के अक्सर फ़ैसले होते ग़लत थे

अब मिला करते हैं मयखानों में वो लोग
जो कभी कहते कि मयख़ाने ग़लत थे

  - Nakul kumar

Dil Shayari

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