याद थे जो रस्ते वो रस्ते ग़लत थे
सपनों पे चलते थे और सपने ग़लत थे
अब समझ आता हैं उनको देख कर ये
फ़ैसलों में अपने हम कितने ग़लत थे
साथ उसके थे भरम वाले वो दिन थे
अच्छे थे वो दिन मगर वैसे ग़लत थे
दिल भी पागल हैं निभाता था मरासिम
दिल के अक्सर फ़ैसले होते ग़लत थे
अब मिला करते हैं मयखानों में वो लोग
जो कभी कहते कि मयख़ाने ग़लत थे
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Nakul kumar
our suggestion based on Nakul kumar
As you were reading Dil Shayari Shayari