शदीद उलझनें सब ख़्वाहिशें जला रही हैंअजीब हाल है मेरा समझ नहीं आतायूँ ज़िंदा रहना भी क्या कोई बेवक़ूफ़ी है याकोई कमाल है मेरा समझ नहीं आता— Nakul kumar