jinhen ham dekh kar jeete the naasir | जिन्हें हम देख कर जीते थे 'नासिर'

  - Nasir Kazmi

जिन्हें हम देख कर जीते थे 'नासिर'
वो लोग आँखों से ओझल हो गए हैं

  - Nasir Kazmi

Aadmi Shayari

Our suggestion based on your choice

    अपनी हस्ती का भी इंसान को इरफ़ांन हुआ
    ख़ाक फिर ख़ाक थी औक़ात से आगे न बढ़ी
    Shakeel Badayuni
    20 Likes
    वो लोग हम ही थे मुहब्बत में जो फिर आगे हुए
    वो लोग हम ही थे मियाँ जो दूर भागे जिस्म से
    Kartik tripathi
    हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी
    जिस को भी देखना हो कई बार देखना
    Nida Fazli
    37 Likes
    बहुत से लोग हैं तस्वीर में अच्छे बहुत अच्छे
    तेरे चेहरे पे ही मेरी नज़र हरदम ठहरती है
    Umesh Maurya
    अच्छों से पता चलता है इंसाँ को बुरों का
    रावन का पता चल न सका राम से पहले
    Rizwan Banarasi
    38 Likes
    ठहाका मार कर हथियार हँसते
    नहीं जीतेंगे अब इंसान हमसे
    Umesh Maurya
    हम तो सुनते थे कि मिल जाते हैं बिछड़े हुए लोग
    तू जो बिछड़ा है तो क्या वक़्त ने गर्दिश नहीं की
    Ambreen Haseeb Ambar
    23 Likes
    कैसे मंज़र सामने आने लगे हैं
    गाते गाते लोग चिल्लाने लगे हैं
    Dushyant Kumar
    39 Likes
    यार तस्वीर में तन्हा हूँ मगर लोग मिले
    कई तस्वीर से पहले कई तस्वीर के बा'द
    Umair Najmi
    63 Likes
    शरीफ़ इन्सान आख़िर क्यों इलेक्शन हार जाता है
    क़िताबों में तो ये लिक्खा था रावन हार जाता है
    Munawwar Rana
    37 Likes

More by Nasir Kazmi

As you were reading Shayari by Nasir Kazmi

    दिल धड़कने का सबब याद आया
    वो तिरी याद थी अब याद आया
    Nasir Kazmi
    38 Likes
    आरज़ू है कि तू यहाँ आए
    और फिर उम्र भर न जाए कहीं
    Nasir Kazmi
    29 Likes
    वो कोई दोस्त था अच्छे दिनों का
    जो पिछली रात से याद आ रहा है
    Nasir Kazmi
    69 Likes
    वक़्त अच्छा भी आएगा 'नासिर'
    ग़म न कर ज़िंदगी पड़ी है अभी
    Nasir Kazmi
    54 Likes
    दिल में और तो क्या रक्खा है
    तेरा दर्द छुपा रक्खा है

    इतने दुखों की तेज़ हवा में
    दिल का दीप जला रक्खा है

    धूप से चेहरों ने दुनिया में
    क्या अंधेर मचा रक्खा है

    इस नगरी के कुछ लोगों ने
    दुख का नाम दवा रक्खा है

    वादा-ए-यार की बात न छेड़ो
    ये धोका भी खा रक्खा है

    भूल भी जाओ बीती बातें
    इन बातों में क्या रक्खा है

    चुप चुप क्यूँ रहते हो 'नासिर'
    ये क्या रोग लगा रक्खा है
    Read Full
    Nasir Kazmi

Similar Writers

our suggestion based on Nasir Kazmi

Similar Moods

As you were reading Aadmi Shayari Shayari