किस की आँखों में समाए रहते हो
इश्क़ की दुनिया बसाए रहते हो
इक नज़र यूँ मुस्कुरा के देखो भी
दिल को तुम मेरे जलाए रहते हो
प्यार हम से तो कहाँ करते हो तुम
सारी दुनिया को रिझाए रहते हो
दिल को भी यूँ हम तसल्ली कैसे दें
आँखों में ऐसे ही छाए रहते हो
— Naviii dar b dar















