“श्री राम स्तुति”
सृष्टि में हैं राम राम
दृष्टि में हैं राम राम
राम के बिना न कोई
जग में आराम है
फल फूल पतझर
नव वृक्षों की कोपल
जीवन के प्रारंभ तो
राम जी के नाम है
साँस साँस चलती जाए
राह यूँ सँभलती जाए
दो तुम आशीष
बिगड़े बन जाए काम हैं
जीवन के हर पल
मिलते रहें प्रतिफल
मेरे इस जीवन में
आदर्श प्रभु राम हैं
— Naviii dar b dar















