ख़्वाब के झूले में ये मिसरा हुआ है

आजकल उस ने मुझे पहना हुआ है

पा में उस के मैं महावर की तरह हूँ
लम्स फूलों की तरह बिखरा हुआ है

वस्ल की रातों में अक्सर ये लगा है
ख़ामुशी ने शोर को ओढ़ा हुआ है

काश रख दे होंठ पर वो होंठ मेरे
कुछ दिनों से ज़ाइक़ा बिगड़ा हुआ है

यार उस ने हाथ पकड़ा तो लगा बस
हाथ दुनिया ने मिरा पकड़ा हुआ है

अब हक़ीक़त भी सुनो ग़म-ख़्वार मेरे
सबने अपना कह मुझे छोड़ा हुआ है

— Neeraj Neer

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