टूटना देखते हैं तारों का
घर कहाँ होगा बेसहारों का
हर किसी का कोई न कोई है
सोच कर देखिए किनारों का
आप तो देख भी नहीं सकते
नाम क्या लेंगे हम चमारों का
पाँव के साथ आँख पर छाले
कौन समझेगा दुख कहारों का
उस ने बाहें गले में डाली है
क्या ही करना है इन बहारों का
नाक छिदवा लिया है लड़की ने
बढ़ गया काम अब सुनारों का
नीरज नीर
— Neeraj Neer















