छोड़ के जब से गया दिलबर हमारा
दिल कहीं लगता नहीं पलभर हमारा
लो ले जाओ यार अब तुम ही सँभालो
है नहीं अब ज़ोर इस दिल पर हमारा
जानते हो फिर भी तुम क्यूँ पूछते हो
चल रहा है किस से अब चक्कर हमारा
हम भी रोने लगते हैं अब साथ में यार
रोता है बरसात में जब घर हमारा
— NISHKARSH AGGARWAL















