tumhein aañsu bahaane ko bhi mil jaayen kaii kandhe | तुम्हें आँसू बहाने को भी मिल जाएँ कई कंधे

  - Pallav Mishra

तुम्हें आँसू बहाने को भी मिल जाएँ कई कंधे
मगर मुझ को अज़िय्यत में परेशाँ कौन देखेगा

तुम्हीं जो उस की ख़ातिर जागते बैठे रहे शब भर
जो अब सो जाओ तो सुब्ह-ए-दरख़्शाँ कौन देखेगा

मैं भागा तो चला आऊँ तुम्हारी इक निदा सुन कर
सर-ए-वक़्त-ए-जुनूँ इनकार-ए-दरबाँ कौन देखेगा

मैं तेरे हिज्र में बैठा हुआ कुछ फूल गिन लूँगा
मियान-ए-बे-दिली रंग-ए-गुलिस्ताँ कौन देखेगा

तुम्हें क्यूँँ फ़िक्र रहती है मिरे पिंदार की जानाँ
तुम्हारे रुख़ के आगे मुझ को उर्यां कौन देखेगा

  - Pallav Mishra

Raat Shayari

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