तेरे होने से रौशनी होगी
वर्ना तो दिन में तीरगी होगी
ज़िन्दगी जिस तरह हुई रुख़्सत
उस की भी कोई बेबसी होगी
मैं इसी सम्त ही तो बैठा हूँ
तेरी जिस सम्त वापसी होगी
तेरे क़दमों की आहटें अब भी
इन दरख़्तों ने रख रखी होगी
चुप रहा मैं तो बस इसी ख़ातिर
तू समझ लेगा दोस्ती होगी
तेरे आने का वक़्त क्या देखें
ये घड़ी ख़ुद ही गिन चुकी होगी
और तो साथ क्या रहा पारस
साथ तेरे तो बे-रुख़ी होगी
— Paras Angral















