baadbaan khulne se pehle ka ishaara dekhna | बादबाँ खुलने से पहले का इशारा देखना

  - Parveen Shakir

बादबाँ खुलने से पहले का इशारा देखना
मैं समुंदर देखती हूँ तुम किनारा देखना

यूँ बिछड़ना भी बहुत आसाँ न था उस से मगर
जाते जाते उस का वो मुड़ कर दोबारा देखना

किस शबाहत को लिए आया है दरवाज़े पे चाँद
ऐ शब-ए-हिज्राँ ज़रा अपना सितारा देखना

क्या क़यामत है कि जिन के नाम पर पसपा हुए
उन ही लोगों को मुक़ाबिल में सफ़-आरा देखना

जब बनाम-ए-दिल गवाही सर की माँगी जाएगी
ख़ून में डूबा हुआ परचम हमारा देखना

जीतने में भी जहाँ जी का ज़ियाँ पहले से है
ऐसी बाज़ी हारने में क्या ख़सारा देखना

आइने की आँख ही कुछ कम न थी मेरे लिए
जाने अब क्या क्या दिखाएगा तुम्हारा देखना

एक मुश्त-ए-ख़ाक और वो भी हवा की ज़द में है
ज़िंदगी की बेबसी का इस्तिआ'रा देखना

  - Parveen Shakir

Samundar Shayari

Our suggestion based on your choice

    अब तो दरिया सूख चुका है
    अब तो इस शम्मा को बुझा दो
    Siddharth Saaz
    27 Likes
    मुहब्बत आपसे करना कभी आसाँ नहीं था पर
    बिना कश्ती के दरिया पार करना शौक़ है मेरा
    Tanoj Dadhich
    31 Likes
    इक मुहब्बत से भरी उस ज़िंदगी के ख़्वाब हैं
    पेड़ दरिया और पंछी तेरे मेरे ख़्वाब हैं
    Neeraj Nainkwal
    अगर फ़ुर्सत मिले पानी की तहरीरों को पढ़ लेना
    हर इक दरिया हज़ारों साल का अफ़्साना लिखता है
    Bashir Badr
    38 Likes
    ये आग वाग का दरिया तो खेल था हम को
    जो सच कहें तो बड़ा इम्तिहान आँसू हैं
    Abhishek shukla
    22 Likes
    बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर
    जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियाँ उड़ जाएँ
    Rahat Indori
    47 Likes
    बहर से ख़ारिज हूँ ये मालूम है
    पर तुम्हारी ही ग़ज़ल का शेर हूँ
    Gyan Prakash Akul
    42 Likes
    हमने तुझ पे छोड़ दिया है
    कश्ती, दरिया, भँवर, किनारा
    Siddharth Saaz
    37 Likes
    तिरे एहसास में डूबा हुआ मैं
    कभी सहरा कभी दरिया हुआ मैं
    Siraj Faisal Khan
    28 Likes
    ज़रा पाने की चाहत में बहुत कुछ छूट जाता है
    नदी का साथ देता हूँ समंदर रूठ जाता है
    Aalok Shrivastav
    47 Likes

More by Parveen Shakir

As you were reading Shayari by Parveen Shakir

    तुझ को क्या इल्म तुझे हारने वाले कुछ लोग
    किस क़दर सख़्त नदामत से तुझे देखते हैं
    Parveen Shakir
    18 Likes
    बस ये हुआ कि उस ने तकल्लुफ़ से बात की
    और हम ने रोते रोते दुपट्टे भिगो लिए
    Parveen Shakir
    39 Likes
    वो हम नहीं जिन्हें सहना ये जब्र आ जाता
    तिरी जुदाई में किस तरह सब्र आ जाता

    फ़सीलें तोड़ न देते जो अब के अहल-ए-क़फ़स
    तू और तरह का एलान-ए-जब्र आ जाता

    वो फ़ासला था दुआ और मुस्तजाबी में
    कि धूप माँगने जाते तो अब्र आ जाता

    वो मुझ को छोड़ के जिस आदमी के पास गया
    बराबरी का भी होता तो सब्र आ जाता

    वज़ीर ओ शाह भी ख़स-ख़ानों से निकल आते
    अगर गुमान में अँगार-ए-क़ब्र आ जाता
    Read Full
    Parveen Shakir
    धनक धनक मिरी पोरों के ख़्वाब कर देगा
    वो लम्स मेरे बदन को गुलाब कर देगा

    क़बा-ए-जिस्म के हर तार से गुज़रता हुआ
    किरन का प्यार मुझे आफ़्ताब कर देगा

    जुनूँ-पसंद है दिल और तुझ तक आने में
    बदन को नाव लहू को चनाब कर देगा

    मैं सच कहूँगी मगर फिर भी हार जाऊँगी
    वो झूट बोलेगा और ला-जवाब कर देगा

    अना-परस्त है इतना कि बात से पहले
    वो उठ के बंद मिरी हर किताब कर देगा

    सुकूत-ए-शहर-ए-सुख़न में वो फूल सा लहजा
    समाअ'तों की फ़ज़ा ख़्वाब ख़्वाब कर देगा

    इसी तरह से अगर चाहता रहा पैहम
    सुख़न-वरी में मुझे इंतिख़ाब कर देगा

    मिरी तरह से कोई है जो ज़िंदगी अपनी
    तुम्हारी याद के नाम इंतिसाब कर देगा
    Read Full
    Parveen Shakir
    अपनी तन्हाई मिरे नाम पे आबाद करे
    कौन होगा जो मुझे उस की तरह याद करे

    दिल अजब शहर कि जिस पर भी खुला दर इस का
    वो मुसाफ़िर इसे हर सम्त से बरबाद करे

    अपने क़ातिल की ज़ेहानत से परेशान हूँ मैं
    रोज़ इक मौत नए तर्ज़ की ईजाद करे

    इतना हैराँ हो मिरी बे-तलबी के आगे
    वा क़फ़स में कोई दर ख़ुद मिरा सय्याद करे

    सल्ब-ए-बीनाई के अहकाम मिले हैं जो कभी
    रौशनी छूने की ख़्वाहिश कोई शब-ज़ाद करे

    सोच रखना भी जराएम में है शामिल अब तो
    वही मासूम है हर बात पे जो साद करे

    जब लहू बोल पड़े उस के गवाहों के ख़िलाफ़
    क़ाज़ी-ए-शहर कुछ इस बाब में इरशाद करे

    उस की मुट्ठी में बहुत रोज़ रहा मेरा वजूद
    मेरे साहिर से कहो अब मुझे आज़ाद करे
    Read Full
    Parveen Shakir

Similar Writers

our suggestion based on Parveen Shakir

Similar Moods

As you were reading Samundar Shayari Shayari