ek waqt se yaaron ki dil | एक वक़्त से यारों की दिल्लगी चल रही हैं

  - Praveen Bhardwaj

एक वक़्त से यारों की दिल्लगी चल रही हैं
जिस तरह से भी चले ज़िन्दगी चल रही हैं

तू बता क्या रुख हैं हवाओं का तेरे यहाँ
हमारे यहाँ तो बस हल्की-हल्की चल रही हैं

ये वक़्त हैं की चाहो तो ख़रीद लो मकाँ मेरा
इस वक़्त मेरे सामने एक बेबसी चल रही हैं

मेरे दोस्तों के दुश्मनों से ता'उम्र मेरी दुश्मनी
मेरे दुश्मनों से दोस्तों की, दोस्ती चल रहीं हैं

जिनके महफ़िलों में मेरे नाम पे भी पाबंद हैं
उनके महफ़िलों में मेरी शायरी चल रही हैं

  - Praveen Bhardwaj

Raqeeb Shayari

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