दुआऍं देतीं भर भर के मुझे प्यारी तेरी आँखें
ख़ुदा की बख़्शी नेमत सी परिस्तारी तेरी आँखें
मुझे काँटों सी लगती है ये जीवन बग़िया सारी ही
यहाँ मिलता सुकूँ माँ लगतीं फुलवारी तेरी आँखें
अकेली निकले घर से या भरी महफ़िल में जाऍं वो
वहाँ पे आदमी बन जातीं बाज़ारी तेरी आँखें
रहे क़ाएम समुंदर में भी रहके तिश्नगी अब तो
कहें सारी कहानी यूँ ही ग़म-ख़्वारी तेरी आँखें
यूँ हाल- ए- दिल सुनाती ख़ामुशी से प्रीत तो हरदम
शिकायत भी नहीं दिल साफ़ और भारी तेरी आँखें
— Harpreet Kaur















