गुलाबों सी मैं वो बूढ़े शजर की बात करता है
मुहब्बत छोड़ कर वो दुनिया भर की बात करता है
रखा करते थे दुनिया घूमने का ख़्वाब आँखों में
वो हरदम ही बसर करने को घर की बात करता है
मिले जो वस्ल की शब दिल की हर इक बात कह डालूँ
न जाने क्यूँ मेरा दिलबर सहर की बात करता है
करें ज़ख़्मी मेरे दिल को यूँ बातों के ही नश्तर से
चलाऊँ फोन दो पल तो पहर की बात करता है
बनाई ज़िन्दगी वीराँ सी उस ने प्रीत की है और
बहारों और ख़्वाबों की डगर की बात करता है
— Harpreet Kaur















