इस ज़माने से शिकायत है मुझे
हर रवायत से अदावत है मुझे
रंग दुनिया के बदलते देखे यूँ
अब यहाँ पे सब से नफ़रत है मुझे
आज़माने का हुनर सब में ही है
क्यूँ निभाने की ये आदत है मुझे
चाँदनी रातों की जन्नत तीरगी
चंद लम्हों की ये फ़ुर्सत है मुझे
चुप लगा ले 'प्रीत' वाजिब है यही
लोग देते यूँ हिदायत है मुझे
— Harpreet Kaur















