ज़ाया' किया है वक़्त जो आवारगी मेंशायद ही लौटेगा कभी वो ज़िन्दगी मेंइतना गुज़ारा वक़्त मैं ने रौशनी बिनलगने लगा अच्छा मुझे अब तीरगी में— Pushpendra Panchal