कुछ नहीं हो सका वैसे अब क्या करूँँजीत के हारा मैं कैसे अब क्या करूँहोना जो था वहीं हो गया मेरे साथगिर के यूँ तो उठा जैसे अब क्या करूँ— Parvez Shaikh