ख़्वाबों की अफ़्सुर्दा हवा में रहने वाले सुर्ख़ गुलाब

जंगल की तारीक फ़ज़ा में ले के निकल आते हैं चराग़
रात गए जब चाँद का चेहरा देखते हैं शरमाते हैं
और किसी ग़मगीन शजर के साए में सो जाते हैं
देखो अपने दिल की लगन में बहने वाले सुर्ख़ गुलाब
आख़िर अपने दिल की लगन में अपना पा जाते हैं सुराग़
या'नी ख़्वाब में सूरज बन के जंगल में लहराते हैं
वो जो किसी ग़मगीन शजर के साए में सो जाते हैं

— Qamar Jameel

More by Qamar Jameel

Other nazm from the same pen

See all from Qamar Jameel →

Chaand Shayari

Shers of chaand.

All Chaand Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling