सितम तो ये है कि वो भी न बन सका अपनाक़ुबूल हम ने किए जिस के ग़म ख़ुशी की तरहकभी न सोचा था हम ने 'क़तील' उस के लिएकरेगा हम पे सितम वो भी हर किसी की तरह— Qateel Shifai