हमें अब मत करो हैरान छोड़ो
हुकुम जी तुम हमारी जान छोड़ो
हमारी ज़िन्दगी तक खा गए हो
हुज़ूर अब आप दस्तर-ख़्वान छोड़ो
ये ख़ाली पेट मर जाएँगे साहब
तुम इन के खेत और खलियान छोड़ो
ज़माना बेच कर खाओ भले तुम
ख़ुदा के वास्ते ईमान छोड़ो
अगर तुम को नहीं है प्यार हम से
हमारे घर का फिर दालान छोड़ो
— Raaz Gurjar















